देहात थाना प्रभारी विकास यादव पर एक तरफा दवाब मे
देहात थाना प्रभारी विकास यादव पर एक तरफा दवाब मे कारवाही करने का आरोप पहले भी रह चके हैं विवादित
बजरंग दल नेता से विवाद में 'खाकी' की भूमिका संदिग्ध: क्या थाना प्रभारी विकास यादव ने बिना जांच के निर्दोषों को भेजा जेल••?
शिवपुरी। देहात थाना क्षेत्र के झांसी तिराहा पर 27 फरवरी की रात हुई कथित घटना ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में थाना प्रभारी विकास यादव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सिख समाज ने सीधे तौर पर पुलिस पर सत्ता और संगठन के दबाव में एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला••?
27 फरवरी की रात बजरंग दल के विभाग संयोजक उपेंद्र यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दो युवकों, दिव्यम सैनी और आशुतोष लोधी ने उनकी कार रोककर शराब के लिए ₹2000 मांगे और मना करने पर रॉड से हमला कर दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया और युवकों को जेल भेज दिया।
थाना प्रभारी विकास यादव पर उठते 5 बड़े सवाल:
1. बिना तस्दीक के गिरफ्तारी क्यों? समाज का आरोप है कि थाना प्रभारी ने केवल शिकायतकर्ता के रसूख को देखते हुए आनन-फानन में कहानी गढ़ी और बिना किसी ठोस सबूत या स्वतंत्र गवाह के बच्चों को अपराधी घोषित कर दिया।
2. कहानी में झोल, फिर भी कार्रवाई? शिकायत में कहा गया कि रॉड से हमला हुआ और मोबाइल टूट गया, लेकिन सिख समाज का पूछना है कि क्या मौके पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई? क्या थाना प्रभारी ने यह सुनिश्चित किया कि हमला हुआ था या यह महज एक आपसी बहस थी जिसे 'लूट और हमले' का रंग दिया गया?
3. एकतरफा जांच का आरोप: आरोप है कि विकास यादव ने दूसरे पक्ष की बात सुनना भी मुनासिब नहीं समझा। क्या पुलिस अब केवल रसूखदारों के इशारे पर काम कर रही है?
4. मनगढ़ंत थ्योरी पर सवाल: जिस तरह से 'शराब के लिए पैसे मांगने' की कहानी एफआईआर में दर्ज की गई है, उसे समाज ने पूरी तरह काल्पनिक बताया है। सवाल यह है कि क्या थाना प्रभारी ने इस कहानी की सत्यता जांचने की कोशिश की या सीधे 'ऊपर' के आदेश का पालन किया?
5. निष्पक्षता की कसौटी पर पुलिस: पुलिस का काम न्याय करना है, न कि किसी संगठन के दबाव में आकर युवाओं का भविष्य बर्बाद करना। थाना प्रभारी की इस जल्दबाजी ने पुलिस की छवि पर दाग लगा दिया है।
एसपी दफ्तर पहुंचा सिख समाज, निष्पक्ष जांच की मांग सोमवार को भारी संख्या में सिख समाज के लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और एक ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि दिव्यम और आशुतोष पर दर्ज प्रकरण पूर्णतः झूठा और आधारहीन है।
"हमारे बच्चों को साजिश के तहत फंसाया गया है। थाना प्रभारी ने तथ्यों को नजरअंदाज कर एकतरफा कार्रवाई की है। अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई और निर्दोषों को न्याय नहीं मिला, तो समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।"
थाना प्रभारी विकास यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने पुलिस की 'निष्पक्षता' को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस अधीक्षक इस मामले में हस्तक्षेप कर क्या दूध का दूध और पानी का पानी करते हैं, या खाकी का रसूख इसी तरह निर्दोषों पर भारी पड़ता रहेगा।
