माननीय' ने खेल के मैदान में उगा दी गेहूं की फसल; जब गरजा प्रशासन का डंडा, तो बगले झांकने लगे SDM

 


माननीय' ने खेल के मैदान में उगा दी गेहूं की फसल; जब गरजा प्रशासन का डंडा, तो बगले झांकने लगे SDM


मगरौनी (शिवपुरी)। सियासत की पिच पर दांव-पेंच आजमाने वाले जब खेल के मैदान को ही खेत बना लें, तो कानून को मोर्चा संभालना ही पड़ता है। करैरा के पूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल द्वारा राम-जानकी स्टेडियम की सरकारी जमीन पर किए गए "हरियाली के अतिक्रमण" पर आखिरकार प्रशासन का बुलडोजर (राजस्व अमला) चल ही गया। बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई ने इलाके में हड़कंप मचा दिया।


स्टेडियम की जमीन पर 'अन्नदाता' बने पूर्व विधायक

नगर परिषद मगरौनी स्थित राम-जानकी स्टेडियम, जो युवाओं के भविष्य के लिए सुरक्षित था, उस पर रसूख की ऐसी फसल लहलहाई कि खेल का मैदान गुम हो गया।सर्वे नंबर 476 व 479: कुल 2.32 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की शिकायत थी।कलेक्टर के आदेश पर विशेष ईटीएस (ETS) मशीन मंगवाई गई। कई तहसीलों के पटवारी तैनात किए गए। सीमांकन में पाया गया कि पूर्व विधायक लाखन सिंह बघेल ने स्टेडियम की करीब 25 फीट जमीन दबाकर वहां गेहूं की बोहनी कर दी थी।


घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा: प्रशासन बनाम रसूख

दोपहर से शुरू हुई कार्रवाई रात 10 बजे तक खिंची। तीन थानों की पुलिस और राजस्व की फौज देखकर अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। पूर्व विधायक और एसडीएम अनुराग निगवाल के बीच तीखी बहस हुई। जब प्रशासन ने गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चलवाया और सीमांकन किया, तो पूर्व विधायक ने 'जवाबी हमला' बोल दिया।


जब पूर्व विधायक के सवालों ने 'साहब' की बोलती बंद कर दी

कार्रवाई के दौरान पूर्व विधायक लाखन सिंह ने एसडीएम की निष्पक्षता पर ही सवाल दाग दिए। उन्होंने घेरा डालते हुए पूछा

"मगरौनी का बस स्टैंड कहां गायब हो गया? मेला ग्राउंड पर किसका कब्जा है? काली माता मंदिर की जमीन को कौन खा गया? क्या प्रशासन का डंडा सिर्फ यहीं चलेगा या इन जमीनों का भी सीमांकन होगा ?


इन तीखे सवालों के सामने एसडीएम अनुराग निगवाल ऐसे निरूत्तर हुए कि उनके पास 'मौन' रहने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। उन्होंने बस इतना कहा, "आज जो करना था वो हो गया," और वहां से निकल लिए। बाद में मीडिया के फोन भी साहब ने उठाना मुनासिब नहीं समझे।


जनता पूछ रही: क्या कार्रवाई केवल 'चुनिंदा' होगी ?

प्रशासन ने खेल मैदान तो मुक्त करा लिया, लेकिन पूर्व विधायक द्वारा उठाए गए बस स्टैंड और मेला ग्राउंड के अतिक्रमण के सवालों ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या प्रशासन में बाकी रसूखदारों पर हाथ डालने की हिम्मत है ? क्या स्टेडियम की जमीन तो बहाना था, निशाना कोई और था ? 

रात के अंधेरे में खत्म हुई यह कार्रवाई क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह है कि एसडीएम साहब जिन सवालों पर 'निरूत्तर' हुए, क्या उनका जवाब आने वाले दिनों में किसी नई कार्रवाई से देंगे ।


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