जिले में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर लगेगा पर्यावरण मुआवजा
जिले में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर लगेगा पर्यावरण मुआवजा
शिवपुरी, 9 मार्च 2026/ मध्यप्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुपालन में जिला शिवपुरी में फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेष ठूंठ एवं डंठल (पराली/नरवाई) को जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। इस संबंध में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रवीन्द्र कुमार चौधरी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी किया है।
जारी आदेश के अनुसार फसल कटाई के उपरांत खेतों में बचे अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण एवं आगजनी की घटनाओं की संभावना बढ़ती है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा भूमि की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिले में नरवाई जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
आदेश में यह भी निर्देशित किया गया है कि हार्वेस्टर मशीन संचालकों को स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग करना अनिवार्य होगा, ताकि फसल अवशेषों का खेत में ही भूसे के रूप में निपटान किया जा सके। साथ ही प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर संचालक को फसल कटाई प्रारंभ करने से पूर्व कृषि विभाग में सहायक कृषि यंत्री, कृषि अभियांत्रिकी कार्यालय शिवपुरी में पंजीयन कराना होगा तथा मशीन और ऑपरेटर से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होगी। यदि कोई कृषक स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना फसल कटाई कराने के लिए दबाव बनाता है, तो संबंधित हार्वेस्टर संचालक इसकी सूचना ग्राम पंचायत के निगरानी अधिकारी, पंचायत सचिव, संबंधित थाना, नायब तहसीलदार, तहसीलदार या अनुविभागीय दंडाधिकारी को देगा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कृषकों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जाएगा। दो एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक भूमि वाले कृषकों पर 5,000 रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों पर 15,000 रुपये प्रति घटना पर्यावरण मुआवजे के रूप में देय होगा। साथ ही अधीक्षण यंत्री, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, शिवपुरी को निर्देशित किया गया है कि ट्रांसफार्मरों के आसपास संभावित आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक निरीक्षण एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 सहित अन्य प्रासंगिक अधिनियमों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।