01 अप्रैल से ‘ई-विकास’ प्रणाली के माध्यम से ही होगा उर्वरक का विक्रयकिसानों एवं विक्रेताओं के लिए दिशा-निर्देश जारी

1 अप्रैल से ‘ई-विकास’ प्रणाली के माध्यम से ही होगा उर्वरक का विक्रयकिसानों एवं विक्रेताओं के लिए दिशा-निर्देश जारी

 जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से 01 अप्रैल 2026 से समस्त उर्वरकों का विक्रय अनिवार्य रूप से ‘ई-विकास’ प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इस संबंध में जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

नई व्यवस्था के अंतर्गत किसान ई-विकास पोर्टल पर स्वयं का पंजीयन कर ई-टोकन जनरेट कर सकेंगे तथा अपनी सुविधा अनुसार चयनित डीलर से उर्वरक प्राप्त कर पाएंगे। पोर्टल पर विभिन्न श्रेणियों के किसानों के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे किसान जिनकी भूमि ‘एग्री स्टैक’ पर प्रदर्शित नहीं हो रही है, वे पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा दो दिवस के भीतर ऑनलाइन सत्यापन उपरांत उन्हें ई-टोकन जारी किया जाएगा। सिकमी एवं बटाईदार किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर ‘ऑथोराइजेशन मॉड्यूल’ उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से भूमि स्वामी वास्तविक खेती करने वाले किसान को उर्वरक प्राप्ति हेतु अधिकृत कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त मृत, वृद्ध एवं दिव्यांग किसानों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे उन्हें उर्वरक प्राप्ति में किसी प्रकार की असुविधा न हो। संयुक्त खाताधारकों के मामलों में, यदि कोई सदस्य आधार ओटीपी उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो अन्य खाताधारकों में से किसी एक को नामांकित करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे केवल ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही उर्वरक विक्रय सुनिश्चित करें। निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


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