यह केवल पुलिस का विषय नहीं रह जाता, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

 


शिक्षक का बेटा हो या पुजारी का, आखिर युवाओं को अपराध की राह पर जाने से कौन रोकेगा?

शिवपुरी जिले में पिछले दिनों पुलिस की कार्रवाई में सामने आए दो मामलों ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मामले में शिक्षक के बेटे का नाम स्मैक से जुड़े प्रकरण में सामने आया, वहीं दूसरे मामले में गुना जिले के भार्गव कॉलोनी क्षेत्र में महिला के गले से करीब ढाई लाख रुपये मूल्य का मंगलसूत्र लूटने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में शिवपुरी के प्रसिद्ध खेड़ापति हनुमान मंदिर के पुजारी लक्ष्मण त्यागी का बेटा भी शामिल है।

गुना पुलिस के अनुसार भार्गव कॉलोनी क्षेत्र में महिला के गले से मंगलसूत्र लूटने की वारदात को अंजाम देने वाले तीनों आरोपियों को घटना के मात्र छह घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने घटना से एक दिन पहले गुना रेलवे स्टेशन रोड क्षेत्र से एक मोटरसाइकिल चोरी की थी और उसी बाइक का उपयोग कर स्नेचिंग की वारदात को अंजाम दिया।

गिरफ्तार आरोपियों में कार्तिक पुत्र लक्ष्मण त्यागी उम्र 26 वर्ष निवासी खेड़ापति हनुमान मंदिर के पास शिवपुरी, बल्देव पुत्र निर्मल राठौर उम्र 24 वर्ष निवासी कमलागंज शिवपुरी तथा रोहित पुत्र सत्यभान दुबे उम्र 40 वर्ष निवासी लक्ष्मीनगर दिल्ली शामिल हैं। जांच में सामने आया कि तीनों की पहचान एक नशामुक्ति केंद्र में हुई थी। दिल्ली निवासी रोहित दुबे वहां कार्य करता था, जबकि शिवपुरी निवासी कार्तिक त्यागी और बल्देव राठौर नशा मुक्ति के लिए केंद्र पहुंचे थे। इसी दौरान तीनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में वे अपराध की राह पर चल पड़े।

इन घटनाओं ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जब एक ओर शिक्षक के बेटे का नाम नशे से जुड़े मामले में सामने आए और दूसरी ओर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र खेड़ापति हनुमान मंदिर के पुजारी लक्ष्मण त्यागी का बेटा लूट जैसे गंभीर अपराध में गिरफ्तार हो जाए, तो यह केवल पुलिस का विषय नहीं रह जाता, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं को सही दिशा कौन देगा? परिवार, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं और शिक्षण संस्थान अपनी जिम्मेदारी किस हद तक निभा रहे हैं? नशे के खिलाफ लाखों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, नशामुक्ति केंद्र संचालित किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद यदि सम्मानित परिवारों के युवा अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं, तो व्यवस्था और समाज दोनों को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

पुलिस को भी नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। क्योंकि समय रहते नशे की जड़ों पर प्रहार नहीं किया गया, तो इसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ सकता है। यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है।


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