शिवपुरी की जनता पूछ रही है: भ्रष्टाचार रुकेगा या सिर्फ तबादले होते रहेंगे?

शिवपुरी की जनता पूछ रही है: भ्रष्टाचार रुकेगा या सिर्फ तबादले होते रहेंगे?

शिवपुरी जिला इन दिनों एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां सरकारी जमीनें, राजस्व रिकॉर्ड, अवैध कॉलोनियां, नगर निकायों पर भ्रष्टाचार के आरोप और अधिकारियों के तबादले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले में हो क्या रहा है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रमों को देखा जाए तो सरकारी जमीनों से जुड़े विवाद बार-बार सामने आते रहे हैं। कभी नामांतरण पर सवाल उठे, कभी सरकारी भूमि को निजी हाथों में पहुंचाने के आरोप लगे, कभी रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की शिकायतें हुईं और कभी प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए।

सबसे चर्चित मामलों में सुरवाया क्षेत्र का मामला रहा। यहां राजस्व रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल उठे। आरोप लगे कि तालाब, मंदिर, श्मशान घाट और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। उस समय शिवपुरी के तत्कालीन एसडीएम उमेश कौरव पर भी सवाल उठे। शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए कि राजस्व व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाया गया है। मामला इतना बड़ा हुआ कि प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी और अंततः उमेश कौरव को हटाया गया।

उस समय जनता को लगा था कि शायद अब व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन समय बीतने के साथ जिले में जमीनों से जुड़े नए विवाद सामने आते रहे।

हाल ही में करैरा क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों को लेकर विवाद चर्चा में आया। आरोप लगे कि सरकारी भूमि का हेरफेर कर कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया। चर्चाओं में वर्तमान करैरा विधायक रमेश खटीक के पुत्र, विधायक प्रतिनिधि तथा विधायक प्रतिनिधि की पत्नी के नाम भी सामने आए। इन आरोपों की सत्यता जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही तय होगी, लेकिन इतना जरूर है कि इन घटनाओं ने जनता के मन में अविश्वास पैदा किया है।

इसी दौरान करैरा के एसडीएम अनुराग निघवाल को हटाया गया। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पोहरी के एसडीएम अनुपम शर्मा को करैरा की जिम्मेदारी सौंपी और पोहरी में जेपी गुप्ता को पदस्थ किया। अनुपम शर्मा हाल ही में करैरा पहुंचे हैं और जेपी गुप्ता ने भी हाल में ही पोहरी का कार्यभार संभाला है।

करैरा में अनुराग निगवाल के स्थानांतरण के बाद विरोध प्रदर्शन हुए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए जिनमें विधायक विरोधी नारे लगाए गए। जवाब में विधायक रमेश खटीक ने कहा कि विरोध करने वाले लोग कांग्रेस समर्थित हैं। लेकिन जनता का सवाल किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि व्यवस्था से है। जनता जानना चाहती है कि यदि सरकारी जमीनों में गड़बड़ी हुई है तो दोषी कौन है और कार्रवाई कब होगी?

कोलारस तहसील का मामला भी कम गंभीर नहीं है। यहां भूमि रिकॉर्ड और राजस्व मामलों को लेकर विवाद सामने आए। एक प्रकरण में पटवारी को हटाया गया। कोलारस में लंबे समय से एसडीएम अनूप श्रीवास्तव पदस्थ हैं। उनके कार्यकाल को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो राजस्व व्यवस्था की जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी?

यदि जिले की प्रशासनिक संरचना को देखें तो करैरा में अनुपम शर्मा, कोलारस में अनूप श्रीवास्तव, पोहरी में जेपी गुप्ता, शिवपुरी में आनंद राजावत और पिछोर में ममता शाक्य एसडीएम पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनके अधीन तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की पूरी व्यवस्था कार्य करती है। सरकारी भूमि की सुरक्षा, नामांतरण, सीमांकन, अतिक्रमण हटाना और राजस्व अभिलेखों की निगरानी इसी तंत्र की जिम्मेदारी है।

फिर सवाल यह है कि बार-बार सरकारी जमीनों को लेकर विवाद आखिर क्यों सामने आ रहे हैं?

शिवपुरी नगर क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक है। शहर में बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। आम नागरिक अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीद रहे हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि कॉलोनी वैधानिक रूप से स्वीकृत नहीं है या मूलभूत सुविधाओं का कोई प्रावधान नहीं है। इससे लोगों का पैसा फंस रहा है और भविष्य संकट में पड़ रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवपुरी में आनंद राजावत एसडीएम के साथ-साथ नगर पालिका सीएमओ का दायित्व भी संभाल रहे हैं। ऐसे में जनता यह अपेक्षा करती है कि अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से कार्रवाई हो, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में शहर की अव्यवस्थित वृद्धि और बड़ी समस्या बन सकती है।

दूसरी ओर राजनीतिक मोर्चे पर भी सवाल कम नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव, करैरा विधायक रमेश खटीक, पोहरी विधायक कैलाश कुशवाह, पूर्व विधायक देवेंद्र जैन सहित जिले के तमाम जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी प्रशासन की।

कैलाश कुशवाह ने नगर पंचायत पोहरी, बैराड़ और मकरोनी में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो जांच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो तथ्य जनता के सामने आने चाहिए। लोकतंत्र में पारदर्शिता ही विश्वास की सबसे बड़ी आधारशिला है।

आज शिवपुरी जिले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां रोजगार, उद्योग और निवेश की चर्चा कम तथा भ्रष्टाचार, जमीन विवाद और प्रशासनिक विवादों की चर्चा अधिक होती है। जिले का युवा रोजगार की तलाश में ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, दिल्ली और अन्य शहरों की ओर पलायन कर रहा है। बड़े उद्योगों का अभाव है। फैक्ट्रियों की कमी है। विकास की गति अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है। प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर हैं। जनता की अपेक्षा है कि सरकार केवल तबादलों तक सीमित न रहे बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

कलेक्टर अर्पित वर्मा के सामने भी बड़ी चुनौती है। जिले की जनता यह देख रही है कि प्रशासन केवल फाइलों में कार्रवाई करता है या वास्तव में जमीन पर बदलाव लाता है।

आज शिवपुरी की जनता नेताओं और अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप नहीं सुनना चाहती। जनता को परिणाम चाहिए। जनता चाहती है कि सरकारी जमीनें सुरक्षित रहें, अवैध कॉलोनियां रोकी जाएं, राजस्व रिकॉर्ड पारदर्शी हों, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें।

यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह चिंता और गहरी होगी कि जिले में भ्रष्टाचार केवल एक समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बनता जा रहा है।

शिवपुरी की जनता अब एक ही सवाल पूछ रही है—क्या जिले में भ्रष्टाचार रुकेगा, या फिर अधिकारी बदलते रहेंगे और जनता केवल इंतजार करती रहेगी?

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